صَلِّ يَا سَلَامْ عَلَى الْوَسِيلَةْ
हे शांति के स्रोत, महान मध्यस्थ पर अपनी कृपा बरसाइए।
Hi
صَلِّ يَا سَلَامْ عَلَى الْوَسِيلَةْ
وَشَمْسِ الْأَنَامْ طَلْعَةِ لَيْلَى
ऐ सलामती के स्रोत, उस महान वसीले पर अपनी दुआएँ भेज
जो मख़लूक़ का सूरज और लैला के हुस्न का नूर है
يَا سَاقِي الْعُشَّاقْ أَمْلَ الْكُؤُوسَا
مِنْ خَمْرِ الْأَذْوَاقْ يُحْيِي النُّفُوسَا
ऐ आशिक़ों के साक़ी, ज़रा जाम तो भर दे
ज़ौक़ की उस शराब से जो रूहों को ज़िंदगी बख्शती है
حَضْرَةُ الْإطْلَاقْ أَبْدَتْ شُمُوسَا
مَحَتِ الرَّوَاقْ عَنْ وَجْهِ لَيْلَى
असीमित उपस्थिति से कई सूरज तुलू हुए
जिन्होंने लैला के रुख़सार से हर पर्दे को मिटा दिया
صَلِّ يَا سَلَامْ عَلَى الْوَسِيلَةْ
وَشَمْسِ الْأَنَامْ طَلْعَةِ لَيْلَى
ऐ सलामती के स्रोत, उस महान वसीले पर अपनी दुआएँ भेज
जो मख़लूक़ का सूरज और लैला के हुस्न का नूर है
مُبْتَغَى الْعُشَّاقْ حِينَ تَجَلَّى
فِي ذَاتِ الْخَلَّاقْ اَلْمَوْلَى جَلَّ
आशिक़ों की मुराद उस वक़्त पूरी हुई जब जलवा हुआ
उस ख़ालिक़ की ज़ात में, जो अज़मत वाला मौला है
مِنْ بَحْرِ الْإِطْلَاقْ حِينَ تَجَلَّى
بِكُلِّ رَوْنَقْ جَمَالُ لَيْلَى
ला-महदूद समंदर से जब नूर ज़ाहिर हुआ
तो हर रौनक़ के साथ लैला का जमाल सज गया
صَلِّ يَا سَلَامْ عَلَى الْوَسِيلَةْ
وَشَمْسِ الْأَنَامْ طَلْعَةِ لَيْلَى
ऐ सलामती के स्रोत, उस महान वसीले पर अपनी दुआएँ भेज
जो मख़लूक़ का सूरज और लैला के हुस्न का नूर है
صَاحَتِ الْأَطْيَارْ فَوْقَ الْمَنَابِرْ
وَفَاحَ الْأَزْهَارْ وَالرَّوْضُ عَاطِرْ
मिम्बरों पर परिंदों ने चहकते हुए तराने गाए
फूलों की ख़ुशबू फैल गई और सारा चमन महक उठा
رَنَّتِ الْأَوْتَارْ وَالْحِبُّ حَاضِرْ
غَنِّ يَا خَمَّارْ بِحُسْنِ لَيْلَى
साज़ के तार झनझना उठे और महबूब मौजूद है
ऐ साक़ी, अब लैला के हुस्न के नग़मे गा
صَلِّ يَا سَلَامْ عَلَى الْوَسِيلَةْ
وَشَمْسِ الْأَنَامْ طَلْعَةِ لَيْلَى
ऐ सलामती के स्रोत, उस महान वसीले पर अपनी दुआएँ भेज
जो मख़लूक़ का सूरज और लैला के हुस्न का नूर है
يَا عَيْنَ الْعُيُونْ ظَهَرْتَ جَهْرَا
بِجَمْعِ الْفُنُونْ كَأْسًا وَخَمْرَا
ऐ स्रोतों के स्रोत, तू हर जगह साफ़ ज़ाहिर हुआ
हर मिसाल और हर रंग में, जाम में भी और शराब में भी
زَالَتِ الشُّجُونْ طَابَتِ الْحَضْرَةْ
بِالسِّرِّ الْمَكْنُونْ مِنْ كَنْزِ لَيْلَى
सारे ग़म मिट गए और यह हुज़ूरी पाक व साफ़ हो गई
लैला के ख़ज़ाने में छुपे हुए उस राज़ की बदौलत
صَلِّ يَا سَلَامْ عَلَى الْوَسِيلَةْ
وَشَمْسِ الْأَنَامْ طَلْعَةِ لَيْلَى
ऐ सलामती के स्रोत, उस महान वसीले पर अपनी दुआएँ भेज
जो मख़लूक़ का सूरज और लैला के हुस्न का नूर है
اِبْنُ يَلِّسْ هَامْ لَمَّا سُقِيَا
مِنْ خَمْرِ الْأَذْوَاقْ فَانِي بَاقِيَا
इब्न यल्लीस मदहोश हो गया जब उसे पिलाया गया
ज़ौक़ की उस शराब से, वह फ़ना हुआ और फिर बक़ा पाई
عَلَيْكَ السَّلَامْ خَيْرَ الْبَرِيَّةْ
مَا سُقِيَ الْمُدَامْ فِي حَيِّ لَيْلى
आप पर सलाम हो ऐ मख़लूक़ात में सबसे बेहतरीन
जब तक लैला की महफ़िल में जाम-ए-इश्क़ पिलाया जाता रहे