جَمِّلْ أَحْوَالَنَا وَ ارْحَمْ وَ لَاتَمْتَحِنَّا
Beautify Our Condition, Have Mercy on Us, and Do Not Test Us
Hi
Hi
الله الله يَا الله الله الله يَا الله
جَمِّلْ أَحْوَالَنَا وَارْحَمْ وَلَاتَمْتَحِنَّا
अल्लाह, अल्लाह, ऐ अल्लाह! अल्लाह, अल्लाह, ऐ अल्लाह!
हमारी दशा सँवार दे, हम पर रहम कर और हमें आज़माइश में न डाल।
يَا أَكْحَلَ العَيْنْ حَيِّ الدَّانْ لَيْلَةْ سَمَرْنَا
نَكِّشِ الدَّانْ مِنْ مَغْنَى سُلَيْمَا أَلِفْ مَعْنَى
ऐ सुरमई आँखों वाले, हमारी महफ़िल की रात उस धुन को ज़िंदा कर
सुलैमा के मस्कन के नग़्मे से हज़ार मानी ज़ाहिर कर।
مِنْ سَنَا البَرْقْ لِيْ لَألَأْ عَلَى طُورِ سِينَاءْ
يَوْمْ مُوسَى اقْتَبَسْ مِنُّهْ وَ نَحْنُ اصْطَلَيْنَا
उस बिजली की चमक से जो कोह-ए-तूर पर कौंधी
जिस दिन मूसा ने उससे लौ माँगी थी, और हम उसकी आग से गर्म हुए।
مَنْ نَظَرْ مِنْهُ بَرْقَةْ صَاحْ مِنْهَا وَ أَنَّا
مَنْ سَمِعْ أَنَّةَ المَحْزُونْ تَخْشَاهْ يَفْنَى
जिसने भी उसकी एक झलक देखी, वो पुकार उठा और आहें भरने लगा
जो भी उस गमगीन की आह सुने, डर है कि वो वज्द में फ़ना हो जाए।
يَا الله اِرْحَمْهُ وَانْظُرْ لُهْ فَإِنُّهْ مُعَنَّى
مِثِلْ ذُولَاكْ لِي ذَاقُوهْ مِن قَبِلْ كُنَّا
ऐ अल्लाह, उस पर रहम कर और उसे देख क्योंकि वो इश्क़ में बेहाल है
उनकी तरह जिन्होंने हमारे वजूद से पहले ही इसे चख लिया था।
أَهِلْ حَضْرَتِهْ لِي مِنْ شُرْبِهِمْ قَدْ شَرِبْنَا
وَالَّذِي عَاصَرُونَا مَا دَرُوا إِيشْ مَعْنَا
उनकी बारगाह के लोग, जिनकी शराब से हमने पिया है
जबकि हमारे ज़माने के लोग हमारे मक़सद को न जान सके।
مِن شَرَابِ المَحَبَّةْ وَ الصَّفَا لِي شَرِبْنَا
وَاصْطَبَحْنَا مِنْ أَقْدَاحِ الهَوَى وَاغْتَبَقْنَا
मुहब्बत और पाकीज़गी की शराब से हमने पिया है
हमने इश्क़ के प्यालों से सुबह का जाम भी पिया और शाम का भी।
كُلُّ مَنْ كَانْ يُنْكِرْ ذَا يَجِي يَسْتَمِعْنَا
يَسْتَمِعْ فَضْلَنَا نَصَّ الكِتَابِ المُبِينَا
हर वो मुनकिर आए और हमें समाअत करे
वो हमारी फ़ज़ीलत सुने, जो रौशन किताब की साफ़ आयत है।
أَهْلُ بَيْتِ النَّبِيّ أَهْلُ الوَفَا وَاليَقِينَا
هُمْ هُمْ أَهْلُ الكِسَاءْ يَا الله بِهِمْ جُدْ عَلَيْنَا
नबी का घराना, वफ़ा और यक़ीन वाले लोग
वही अहले-किसा हैं, ऐ अल्लाह, उनके वास्ते हम पर अपना फ़ज़्ल कर।
هُمْ هُمْ أَهْلُ الكِسَاءْ يَا الله بِهِمْ جُدْ عَلَيْنَا
بالعَوَافِي فِي الدَّارَيْنْ وَالكُلُّ مِنَّا
वही अहले-किसा हैं, ऐ अल्लाह, उनके वास्ते हम पर अपना फ़ज़्ल कर
दोनों जहाँ में आफ़ियत के साथ, हमारे लिए और हमारे तमाम अपनों के लिए।
جَمِّل أَحْوالَنَا وَ ارْحَمْ وَ لَاتَمْتَحِنَّا
وَ الصَّلَاةُ عَلَى احْمَدْ مَاَ غَفَتْ كُلُّ عَيْنَا
हमारी दशा सँवार दे, हम पर रहम कर और हमें आज़माइश में न डाल
और अहमद पर दुरूद हो जब तक कि हर आँख नींद से बोझल हो।