نَسَمَاتُ هَوَاكَ لَهَا أَرَجُ
तेरे प्यार की बयार सुगंधित है।
نَسَمَاتُ هَوَاكَ لَهَا أَرَجُ
تَحْيَا وَ تَعِيشُ بِهَا المُهَجُ
तुम्हारे प्यार की नरम ब्रीज़ में एक मीठी खुशबू है
उनसे आत्माएँ जीवित रहती हैं और पनपती हैं
مَا النَّاسُ سِوَى قَوْمٍ عَرَفُوكَ
وَ غَيرُهُمُ هَمَجٌ هَمَجُ
लोग वही हैं जिन्होंने तुम्हें पहचाना है,
और बाकी सब तो बस एक बेवकूफ भीड़ हैं
دَخَلُوا فُقَرَاءَ إِلَى الدُّنيَا
وَ كَمَا دَخَلُوا مِنْهَا خَرَجُوا
वे इस दुनिया में गरीब आए,
और जैसे आए थे वैसे ही चले गए
قَومٌ فَعَلُوا خَيْراً فَعَلَوْا
وَ عَلَى دَرَجِ العَلْيَا دَرَجُوا
एक लोग जिन्होंने अच्छे कर्म किए—और इस प्रकार वे उठे,
सबसे ऊँचे पदों की सीढ़ियों पर चढ़ते हुए
نَسَمَاتُ هَوَاكَ لَهَا أَرَجُ
تَحْيَا وَ تَعِيشُ بِهَا المُهَجُ
तुम्हारे प्यार की नरम ब्रीज़ में एक मीठी खुशबू है
उनसे आत्माएँ जीवित रहती हैं और पनपती हैं
مَا النَّاسُ سِوَى قَوْمٍ عَرَفُوكَ
وَ غَيرُهُمُ هَمَجٌ هَمَجُ
लोग वही हैं जिन्होंने तुम्हें पहचाना है,
और बाकी सब तो बस एक बेवकूफ भीड़ हैं
يَا بَدْرُ عَلَامَ الهَجْرُ دُجَى
فَالْقَلبُ لِفَقدِكَ يَنزَعِجُ
ओ पूर्णिमा, जुदाई ने ऐसा अंधकार क्यों लाया
क्योंकि तुम्हारी अनुपस्थिति से दिल वास्तव में परेशान है
لَا أَعتَبُ قَلبَ الغَافِلِ عَنكَ
فَلَيسَ عَلَى الأَعمَى حَرَجُ
मैं उस दिल को दोष नहीं देता जो तुमसे बेखबर है,
क्योंकि अंधे पर कोई दोष नहीं होता
نَسَمَاتُ هَوَاكَ لَهَا أَرَجُ
تَحْيَا وَ تَعِيشُ بِهَا المُهَجُ
तुम्हारे प्यार की नरम ब्रीज़ में एक मीठी खुशबू है
उनसे आत्माएँ जीवित रहती हैं और पनपती हैं
مَا النَّاسُ سِوَى قَوْمٍ عَرَفُوكَ
وَ غَيرُهُمُ هَمَجٌ هَمَجُ
लोग वही हैं जिन्होंने तुम्हें पहचाना है,
और बाकी सब तो बस एक बेवकूफ भीड़ हैं
يَا مُدَّعِياً لِطَرِيقِهِمُ
بَادِر فَطَرِيقُكَ مُنعَرَجُ
ओ तुम जो उनके मार्ग का दावा करते हो,
जल्दी करो—तुम्हारा रास्ता घुमावदार और असमान है
تَهْوَى لَيلَى وَ تَنَامُ الَّيلَ
لَعَمْرُكَ ذا فٍعلٌ سَمِجُ
तुम लैला से प्यार करने का दावा करते हो, फिर भी रात भर सोते हो,
तुम्हारी कसम, ऐसा कार्य वास्तव में अपमानजनक है!
نَسَمَاتُ هَوَاكَ لَهَا أَرَجُ
تَحْيَا وَ تَعِيشُ بِهَا المُهَجُ
तुम्हारे प्यार की नरम ब्रीज़ में एक मीठी खुशबू है
उनसे आत्माएँ जीवित रहती हैं और पनपती हैं
مَا النَّاسُ سِوَى قَوْمٍ عَرَفُوكَ
وَ غَيرُهُمُ هَمَجٌ هَمَجُ
लोग वही हैं जिन्होंने तुम्हें पहचाना है,
और बाकी सब तो बस एक बेवकूफ भीड़ हैं
يا بَدرُ بِذُلٍّ لَن نَبْرَح
عَن بَابِ الحِبِّ فَهَل نَلِجُ
ओ पूर्णिमा, विनम्रता में हम नहीं हटेंगे,
प्रिय के द्वार से, तो क्या हम प्रवेश कर सकते हैं?
فَمَتَى بِوِصَالِكَ يَا أمَلِي
أَلحَانُ الحُبِّ لَهَا هَزَجُ
कब, ओ मेरी आशा, तुम्हारे मिलन से,
क्या प्रेम की धुनें खुशी से गूंजेंगी?
نَسَمَاتُ هَوَاكَ لَهَا أَرَجُ
تَحْيَا وَ تَعِيشُ بِهَا المُهَجُ
तुम्हारे प्यार की नरम ब्रीज़ में एक मीठी खुशबू है
उनसे आत्माएँ जीवित रहती हैं और पनपती हैं
مَا النَّاسُ سِوَى قَوْمٍ عَرَفُوكَ
وَ غَيرُهُمُ هَمَجٌ هَمَجُ
लोग वही हैं जिन्होंने तुम्हें पहचाना है,
और बाकी सब तो बस एक बेवकूफ भीड़ हैं
شَرِبُوا بِكُؤُوسِ تَفَكُّرِهِم
مِن صِرْفِ هَوَاكَ وَ مَا مَزَجُوا
उन्होंने अपने चिंतन के प्यालों से पिया,
तुम्हारे प्रेम की शुद्ध शराब से—अमिश्रित और स्पष्ट
فَهِمُ الْمَعنَى فُهُمُ مَعنَى
وَ بِذِكرِ اللهِ لَهُم لَهَجُ
उन्होंने अर्थ को समझा—वास्तव में, वे स्वयं अर्थ हैं,
और उनकी जीभें सदा ईश्वर के स्मरण में व्यस्त रहती हैं