لِـي بَـيْـنَ وَادِي الـنَّـقَـا وَالـجِـزْعِ أَوطَـارُ
Between the Valley of al-Naqā and al-Jizʿ I Have Desires Untold
Hi
لِـي بَـيْـنَ وَادِي الـنَّـقَـا وَالـجِـزْعِ أَوطَـارُ
مَـتَـى عَـلَـى فَـرَحٍ تَـدْنُـو لَـنَـا الـدَّارُ
वादी-ए-नक़ा और अल-जिज़ के दरमियान मेरी अनगिनत हसरतें हैं,
कब वे मंज़िलें खुशियों के साथ हमारे करीब आएँगी?
إِنِّـي بِـتِـذْكَـارِ بَـانِ الـحَـيِّ ذُو شَـجَـنٍ
دَمْـعِـي لِـفَـرْطِ الـنَّـوَى فِـي الـخَـدِّ مِـدْرَارُ
जब भी मैं कबीले के 'बान' वृक्षों को याद करता हूँ, मैं रंज से भर जाता हूँ,
इस दूरी की शिद्दत से मेरे आँसू रुखसारों पर मुसलसल बहते हैं।
لِـي بَـيْـنَ وَادِي الـنَّـقَـا وَالـجِـزْعِ أَوطَـارُ
مَـتَـى عَـلَـى فَـرَحٍ تَـدْنُـو لَـنَـا الـدَّارُ
वादी-ए-नक़ा और अल-जिज़ के दरमियान मेरी अनगिनत हसरतें हैं,
कब वे मंज़िलें खुशियों के साथ हमारे करीब आएँगी?
يَـا مُـعْـمِـلَ الـعِـيـسِ هَـلْ عَـرَّسْـتَ حَـوْلَ فِـنَـا
وَادِي الـعَـقِـيـقِ وَهَـلْ فِـي الـعِـلْـمِ أَخْـبَـارُ
ऐ ऊँटों को हाँकने वाले, क्या तुम वादी-ए-अक़ीक़ के करीब कुछ पल ठहरे थे?
क्या तुम्हारे पास बताने के लिए कोई ख़बर है?
لِـي بَـيْـنَ وَادِي الـنَّـقَـا وَالـجِـزْعِ أَوطَـارُ
مَـتَـى عَـلَـى فَـرَحٍ تَـدْنُـو لَـنَـا الـدَّارُ
वादी-ए-नक़ा और अल-जिज़ के दरमियान मेरी अनगिनत हसरतें हैं,
कब वे मंज़िलें खुशियों के साथ हमारे करीब आएँगी?
وَهَـلْ مَـرَرْتَ عَـلَـى أَحْـيَـاءِ ذِي سَـلَـمٍ
وَهَـلْ عَـبَـرْتَ الـحِـمَـا وَالـقَـومُ سُـمَّـارُ
और क्या तुम ज़ू-सलम की बस्तियों के पास से गुज़रे?
क्या तुमने उस पाक सरज़मीन को पार किया जब लोग रात को महफ़िल सजाए बैठे थे?
لِـي بَـيْـنَ وَادِي الـنَّـقَـا وَالـجِـزْعِ أَوطَـارُ
مَـتَـى عَـلَـى فَـرَحٍ تَـدْنُـو لَـنَـا الـدَّارُ
वादी-ए-नक़ा और अल-जिज़ के दरमियान मेरी अनगिनत हसरतें हैं,
कब वे मंज़िलें खुशियों के साथ हमारे करीब आएँगी?
إِنِّـي إِلَـى قُـرْبِـهِـمْ قَـدْ زَادَ بِـي شَـغَـفِـي
وَالـقَـلْـبُ أَشْـجَـنَـهُ بِـالـبُـعْـدِ تِـذْكَـارُ
उनके करीब होने की मेरी तड़प और भी बढ़ गई है,
और इस जुदाई में यादों ने मेरे दिल को रंजो-ग़म में डुबो दिया है।
لِـي بَـيْـنَ وَادِي الـنَّـقَـا وَالـجِـزْعِ أَوطَـارُ
مَـتَـى عَـلَـى فَـرَحٍ تَـدْنُـو لَـنَـا الـدَّارُ
वादी-ए-नक़ा और अल-जिज़ के दरमियान मेरी अनगिनत हसरतें हैं,
कब वे मंज़िलें खुशियों के साथ हमारे करीब आएँगी?
لِـي فِـي الْأَجَـارِعِ أَحْـبَـابٌ وَلِـعْـتُ بِـهِـمْ
يَـا مَـا أُحَـيْـلَـى أُوَيْـقَـاتِـي إِذَا زَارُوا
उन मैदानों में मेरे महबूब रहते हैं और मैं उनके इश्क़ में गिरफ़्तार हूँ,
कितने हसीन थे वे लम्हे जब वे हमसे मिलने आते थे!
لِـي بَـيْـنَ وَادِي الـنَّـقَـا وَالـجِـزْعِ أَوطَـارُ
مَـتَـى عَـلَـى فَـرَحٍ تَـدْنُـو لَـنَـا الـدَّارُ
वादी-ए-नक़ा और अल-जिज़ के दरमियान मेरी अनगिनत हसरतें हैं,
कब वे मंज़िलें खुशियों के साथ हमारे करीब आएँगी?
مَـا زَمْـزَمَ الـرَّكْـبُ حَـادِي الـرَّكْـبِ فِـي سَـحَـرٍ
وَمَـا تَـرَنَّـمَ فِـي الْأَغْـصَـانِ أَطْـيَـارُ
जब भी काफ़िले का सारबान सहर के वक़्त अपनी धुन गुनगुनाता है,
और जब भी शाख़ों पर परिंदे चहचहाते हैं—
لِـي بَـيْـنَ وَادِي الـنَّـقَـا وَالـجِـزْعِ أَوطَـارُ
مَـتَـى عَـلَـى فَـرَحٍ تَـدْنُـو لَـنَـا الـدَّارُ
वादी-ए-नक़ा और अल-जिज़ के दरमियान मेरी अनगिनत हसरतें हैं,
कब वे मंज़िलें खुशियों के साथ हमारे करीब आएँगी?
أَلَا وَهَـيَّـجَ مِـنِّـي الـوَجْـدَ وَانْـتَـعَـشَـتْ
رُوحِـي إِلَـى قُـرْبِـهِـمْ وَانْـزَاحَ أَكْـدَارُ
आह! मेरी तड़प फिर से जाग उठी है और मेरी रूह ताज़ा हो गई है,
उनके कुर्ब की चाहत में, और मेरे सारे दुःख मिट गए हैं।