أَلْفٍ صَلَّى الله عَلَى زَيْنِ الْوُجُودْ
वजूद की ज़ीनत पर अल्लाह की हज़ार रहमतें
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أَلْفٍ صَلَّى الله عَلَى زَيْنِ الْوُجُودْ
مَنْ سَكَنْ طَيْبَة وَخَيَّمْ في زَرُودْ
अस्तित्व की सुंदरता पर अल्लाह की हज़ारों रहमतें हों
जो तैबा में बसे और जिन्होंने ज़रूद में पड़ाव डाला
يَا بُدُورَ الْحَيِّ يَا رَبْعَ الْكِرَامْ
بَلِّغُو ظَبْيَ الْحِمَى مِنِّي السَّلَامْ
ऐ बस्ती के पूर्ण चंद्रमा, ऐ शरीफों के ठिकाने
हरम की उस हिरन तक मेरा सलाम पहुँचा दो
إِنْ تَهَتَكْنَا عَلَيْكُمْ لَا نُلَامْ
غَلَبَ الْوَجْدُ عَلَيْنَا وَ الْغَرَامْ
अगर आप पर हमारी दीवानगी हमें रुस्वा कर दे तो हमें दोष न देना
क्योंकि शौक और इश्क़ हम पर पूरी तरह गालिब आ चुके हैं
لَا يَنَامُ اللَّيْلَ عَاشِقْ مُسْتَهَامْ
إِنَّمَا النَّومُ عَلَى الْعَاشِقْ حَرَامْ
वह दीवाना आशिक रात भर नहीं सोता
क्योंकि मोहब्बत में डूबे हुए शख्स पर नींद हराम है
سَادَتِي إِنْ لَمْ تَحِنُّو بِاللِّقَا
مِتُّ وَجْدًا فَلَكُمْ طُولُ الْبَقَاء
मेरे आकाओं, अगर आपने मुलाकात की मेहरबानी न की
तो मैं तड़प कर मर जाऊँगा, मगर आप हमेशा सलामत रहें
أَنَا إِنْ لَمْ أَهْوَا غِزْلَانَ النَّقَاء
أَيُّ فَرْقٍ بَيْنَ قَلْبِي وَ الْجَمَادْ
अगर मैं अल-नक़ा की हिरनों से प्रेम न करूँ
तो फिर मेरे दिल और बेजान पत्थर में क्या अंतर रह जाएगा?
آنَسَ اللهُ بِكُمْ أَوْقَاتَنَا
وَسَقَى وَادِيكُمُ فَيْضَ الْغَمَامْ
अल्लाह आपके ज़रिये हमारे वक्त को खुशनुमा बनाए
और बरसते बादल आपकी वादी को हमेशा सींचते रहें