قصيدة الحجرة النبوية الشريفة
Qasida of the Noble Prophetic Chamber
Hi
يَا سَيِّدِي يَا رَسُولَ اللهِ خُذْ بِيَدِي
مَا لِي سِوَاكَ وَلَا أَلْوِي عَلَى أَحَدِ
ऐ मेरे आक़ा, ऐ अल्लाह के रसूल, मेरा हाथ थाम लीजिए
आपके सिवा मेरा कोई नहीं और न ही मैं किसी और की ओर मुड़ता हूँ
فَأَنْتَ نُورُ الْهُدَى فِي كُلِّ كَائِنَةٍ
وَأَنْتَ سِرُّ النَّدَى يَا خَيْرَ مُعْتَمَدِ
आप हर मख़लूक़ में हिदायत का नूर हैं
और आप ही सख़ावत का राज़ हैं, ऐ सबसे बेहतरीन सहारे
وَأَنْتَ حَقًّا غِيَاثُ الْخَلْقِ أَجْمَعِهِمْ
وَأَنْتَ هَادِي الْوَرَى لِلَّهِ ذِي السَّدَدِ
आप यकीनन तमाम मख़लूक़ात के फ़रियाद-रस और मददगार हैं
और आप ही ख़ल्क़ को सीधी राह दिखाने वाले रहनुमा हैं
يَا مَنْ يَقُومُ مَقَامَ الْحَمْدِ مُنْفَرِدًا
لِلْوَاحِدِ الْفَرْدِ لَمْ يُولَدْ وَلَمْ يَلِدِ
ऐ वो जो तन्हा मकाम-ए-महमूद पर फ़ाइज़ होंगे
उस वाहिद-ओ-अहद के लिए जिसने न किसी को जना और न वो जना गया
يَا مَنْ تَفَجَّرَتِ الْأَنْهَارُ نَابِعَةً
مِنْ إِصْبَعَيْهِ فَرَوَّى الْجَيْشَ بِالْمَدَدِ
ऐ वो जिनकी उँगलियों से पानी के चश्मे फूट निकले
और आपने अपनी मदद से पूरे लश्कर को सैराब कर दिया
إِنِّي إِذَا سَامَنِي ضَيْمٌ يُرَوِّعُنِي
أَقُولُ يَا سَيِّدَ السَّادَاتِ يَا سَنَدِي
जब भी मुझे कोई डराने वाला ज़ुल्म सताता है
मैं पुकारता हूँ, ऐ सरदारों के सरदार, ऐ मेरे सहारे
كُنْ لِي شَفِيعًا إِلَى الرَّحْمَنِ مِنْ زَلَلٍ
وَامْنُنْ عَلَيَّ بِمَا لَا كَانَ فِي خَلَدِي
मेरी ख़ताओं पर रहमान के हुज़ूर मेरी शफ़ाअत फरमाइए
और मुझ पर वो करम कीजिए जो मेरे वहम-ओ-गुमान में भी न था
وَانْظُرْ بِعَيْنِ الرِّضَا لِي دَائِمًا أَبَدًا
وَاسْتُرْ بِفَضْلِكَ تَقْصِيرِي إِلَى الْأَمَدِ
मुझ पर हमेशा-हमेशा के लिए रज़ा की नज़र रखिए
और अपने फ़ज़ल से मेरी कोताहियों को अंत तक छुपा लीजिए
وَاعْطِفْ عَلَيَّ بِعَفْوٍ مِنْكَ يَشْمَلُنِي
فَإِنَّنِي عَنْكَ يَا مَوْلَايَ لَمْ أَحِدِ
अपनी ऐसी माफ़ी के साथ मुझ पर मेहरबानी कीजिए जो मुझे ढाँप ले
क्योंकि ऐ मेरे मौला, मैं आपसे कभी विमुख नहीं हुआ
إِنِّي تَوَسَّلْتُ بِالْمُخْتَارِ أَفْضَلِ مَنْ
رَقَى السَّمَاوَاتِ سِرِّ الْوَاحِدِ الْأَحَدِ
मैंने उन मुख़्तार का वसीला लिया है जो सबसे अफ़ज़ल हैं
जो आसमानों पर तशरीफ़ ले गए और वाहिद-ओ-अहद के राज़ हैं
رَبُّ الْجَمَالِ تَعَالَى اللهُ خَالِقُهُ
فَمِثْلَهُ فِي جَمِيعِ الْخَلْقِ لَمْ أَجِدِ
वो हुस्न के मालिक हैं, बुलंद है वो अल्लाह जिसने उन्हें पैदा किया
सारी मख़लूक में मैंने उनके जैसा कोई नहीं पाया
خَيْرُ الْخَلَائِقِ أَعْلَى الْمُرْسَلِينَ ذُرًى
ذُخْرُ الْأَنَامِ وَهَادِيهِمْ إِلَى الرُّشْدِ
तमाम मख़लूकात में बेहतरीन और रसूलों में सर्वोच्च मकाम वाले
इंसानों का असल सरमाया और उन्हें नेक राह दिखाने वाले
بِهِ الْتَجَأْتُ لَعَلَّ اللهَ يَغْفِرَ لِي
هَذَا الَّذِي هُوَ فِي ظَنِّي وَمُعْتَقَدِي
मैंने उन्हीं की पनाह ली है ताकि शायद अल्लाह मुझे माफ़ कर दे
यही मेरा गुमान है और यही मेरा अटूट अक़ीदा है
فَمَدْحُهُ لَمْ يَزَلْ دَأْبِي مَدَى عُمُرِي
وَحُبُّهُ عِنْدَ رَبِّ الْعَرْشِ مُسْتَنَدِي
उनकी मदह करना उम्र भर मेरा दस्तूर रहा है
और अर्श के रब के हुज़ूर उनकी मुहब्बत ही मेरा सहारा है
عَلَيْهِ أَزْكَى صَلَاةٍ لَمْ تَزَلْ أَبَدًا
مَعَ السَّلَامِ بِلَا حَصْرٍ وَلَا عَدَدِ
उन पर हमेशा-हमेशा पाकीज़ा तरीन दरूद हो
और सलाम हो जिसकी न कोई सीमा हो और न कोई गिनती
وَالْآلِ وَالصَّحْبِ أَهْلِ الْمَجْدِ قَاطِبَةً
وَتَابِعِيهِمْ بِإِحْسَانٍ إِلَى الْأَبَدِ
और उनकी आल और तमाम अज़मत वाले असहाब पर
और कयामत तक भलाई के साथ उनके पीछे चलने वालों पर