بِفَاطِمَةْ قَدْ صَفَا حَالِي
फ़ातिमा से मेरी अवस्था निर्मल हो गई
Hi
Hi
بِفَاطِمَةْ قَدْ صَفَا حَالِي وَنِلْتُ الْمَرَامْ
بِضْعَة مُحَمَّدْ حَبِيبِ اللهْ خَيْرِ الْأَنَامْ
फ़ातिमा के वसीले से मेरा हाल संवर गया और मैंने अपनी मुराद पा ली
आप मुहम्मद ﷺ के जिगर का टुकड़ा, अल्लाह की महबूब और मख़लूक़ में सबसे बेहतर हैं
أَعْلَى لَهَا اللهْ قَدْراً فِي الْعُلَا وَالْمَقَامْ
نِعْمَ الْبَتُولْ الْرَّضِيَّةْ نُورْ كُلِّ الْظَّلَامْ
अल्लाह ने बुलंदी में उनके रुतबे और मक़ाम को ऊंचा किया
क्या ही ख़ूब हैं वो पाकबाज़ और राज़िया, जो हर अंधेरे का नूर हैं
أُمِّ الْحَسَنْ وَالْحُسَيْنْ أَهْلِ الْمَرْقَى الْعِظَامْ
لَهُمْ عَطَايَا مِنَ الْمَوْلَى كِبَارٌ جِسَامْ
हसन और हुसैन की वालिदा, जो अज़ीम मर्तबों वाले हैं
उनके लिए मौला की तरफ़ से बड़े और आलीशान अताये हैं
هُمْ سَادَةَ أَهْلِ الْجِنَانِ الْعَالِيَةْ يَا غُلَامْ
مَنْ حَبَّهُمْ صِدِقْ بَا يِسْكُنْ بِدَارِ الْسَّلَامْ
वो बुलंद जन्नत के सरदार हैं ऐ नौजवान
जिसने उनसे सच्ची मुहब्बत की, वो सलामती के घर में रहेगा
وَمَنْ تَعَلَّقْ بِهِمْ يَظْفَرْ بِنَيْلِ الْمَرَامْ
أَكْرَمْتِ يَا بِضْعَةَ أَحْمَدْ فَانْعَمِي بِالْتَّمَامْ
और जो उनसे वाबस्ता हुआ, उसने अपनी मुराद पा ली
ऐ अहमद के जिगर का टुकड़ा, आप कितनी सखी हैं, अपनी इनायत मुकम्मल फरमाइए
وَامْنَحِي عَبْدَكُمْ فِي الْقُرْبْ أَعْلَى وِسَامْ
نَقُومْ بِحَمِلْ الْرَّيَاتِ الْهُدَ أَحْسَنْ قِيَامْ
और अपने इस गुलाम को क़ुर्बत का सबसे ऊंचा मक़ाम अता कीजिए
ताकि हम हिदायत के परचम को बेहतरीन तरीक़े से बुलंद कर सकें
تَعُمْ دَعْوَتُهْ فِي الْأَكْوَانْ كُلِّ الْأَنَامْ
نِلْبَسْ خِلَعْ إِرْثْ مَا يَصِفْ سَنَاهَا كَلَامْ
ताकि उनकी दावत तमाम कायनात के लोगों में फैल जाए
और हमें नबवी मीरास की ऐसी ख़िलअत मिले जिसकी चमक लफ्ज़ों से परे हो
يَا نُورْ قَلْبِي وَيَا أُمِّي عَلَيْكِ الْسَّلَامْ
فِي كُلِّ حَالٍ وَشَأْنٍ كُلِّ لَحْظَةْ دَوَامْ
ऐ मेरे दिल के नूर और ऐ मेरी माँ, आप पर सलाम हो
हर हाल, हर मामले और हर लम्हे में मुस्तक़िल तौर पर
عَلَيْكِ صَلَّى إِلَهِي مَعَ أَبِيكِ الْإِمَامْ
إِمَامْ كُلِّ الْوَرَى فِي كُلِّ خَاصٍّ وَعَامْ
आप पर और आपके वालिद इमाम पर मेरे रब की रहमतें हों
जो तमाम मख़लूक़, ख़ास और आम, सबके पेशवा हैं
الْشَّافِعِ الْمُبْتَغَ يَوْمَ الْلِّقَاءْ وَالْزَّهَامْ
يَوْمِ الْمَلَائِكْ تُنَادِي جَمِعْ كُلِّ الْأَنَامْ
वो शफीअ जिनकी शफ़ाअत मुलाक़ात और हश्र के दिन मांगी जाएगी
जिस दिन फरिश्ते तमाम इंसानों के मजमे में पुकारेंगे
غُضُّوا أَبْصَارَكُمْ تَمُرْ بِنْتِ الْنَّبِيِ بِالْسَّلَامْ
وَنَكِّسُوا رُؤُوسَكُمْ مَا أَعْظَمَهْ وَاللهْ مَقَامْ
"अपनी निगाहें झुका लो क्योंकि नबी की साहिबज़ादी सलामती के साथ गुज़र रही हैं
और अपने सर नवा लो", ख़ुदा की क़सम क्या ही अज़ीम मक़ाम है!
تِذَكَرِينِي مَعَكِ أَعْبُرْ وَمَنْ لَهُ ذِمَامْ
حَاشَاكِ يَا أُمَّنَا تِنْسِينْ هَذَا الْغُلَامْ
मुझे याद रखिएगा ताकि मैं आपकी हिमायत में आपके साथ पार उतर जाऊं
ऐ हमारी माँ! ये कैसे मुमकिन है कि आप अपने इस बच्चे को भूल जाएं
مَحْسُوبَكُمْ يَرْتَجِيهْ مِنْكُمْ بِهِ الْإِهْتِمَامْ
أَنْتُمْ مَرَامُهْ وَمَقْصُودُهْ وَنِعْمَ الْمَرَامْ
आपका ये बच्चा आपकी तवज्जो और इनायत की उम्मीद रखता है
आप ही उसकी मुराद और मक़्सद हैं, और क्या ही बेहतरीन मक़्सद हैं
يَا بِنْتَ طه فُؤَادِي فِي مَحَبَّتِكْ هَامْ
وَاللهْ أَنْتُمْ مُرَادِي فِي الْدُّنَا وَالْقِيَامْ
ऐ ता-हा की साहिबज़ादी, मेरा दिल आपकी मुहब्बत में सरशार है
ख़ुदा की क़सम, दुनिया और आख़िरत में आप ही मेरी मुराद हैं
وَمَا أَنَا إِلَّا بِكُمْ يَا سَادَتِي يَا كِرَامْ
عَلَيْكِ مَعَ وَالِدِكْ أَزْكَى الْصَّلَاةْ وَالسَّلَامْ
ऐ मेरे सखी सरदारों, मेरा आपके सिवा कोई वजूद नहीं
आप पर और आपके वालिदैन पर पाकीज़ा दुरूद और सलाम हो
وَأَهْلِ الْكِسَاءْ وَأَهْلِ بَيْتِهْ عَالِيِّينَ الْمَقَامْ
وَالْصَّحْبْ أَجْمَعْ وَمَنْ عَلَى هُدَاهْ اِسْتَقَامْ
और अहल-ए-किसा और उनके अहल-ए-बैत पर जो बुलंद मर्तबे वाले हैं
और तमाम सहाबा और उन पर जो हिदायत पर साबित क़दम रहे