مَنْ مِثْلُ أحمد
अहमद जैसा कौन है?
Hi
اللهْ اللهُ اللهْ اللهُ
اللهْ اللهُ تَبَارَكَ اللهُ
अल्लाह अल्लाह, अल्लाह अल्लाह
अल्लाह अल्लाह, मुबारक़ है अल्लाह!
مَنْ مِثْلُ أَحْمَدَ فِي الكَوْنَيْنِ نَهْوَاهُ
بَدْرٌ جَمِيعُ الوَرَى فِي حُسْنِهِ تَاهُوا
दोनों जहानों में अहमद जैसा कौन है जिससे हम मुहब्बत करें?
वह चौदहवीं का चाँद हैं, जिनकी सुंदरता में सारी मख्लूक़ खो गई है।
مَن مِثْلُهُ وَ إِلَهُ الْعَرْشِ شَرَّفَهُ
بِالْخَلْقِ وَ الْخُلْقِ إِنَّ اللَّهَ أَعْطَاهُ
उनके समान कौन है जिन्हें अर्श के मालिक ने सम्मानित किया?
सूरत और सीरत में, यक़ीनन अल्लाह ने उन्हें बहुत कुछ अता किया है।
وَالشَّمْسُ تَخْجَلُ مِنْ أَنْوَارِ طَلْعَتِهِ
حَارَتْ عُقُولُ الْوَرَى فِي فَهْمِ مَعْنَاهُ
और सूरज उनके चेहरे के नूर से शर्मा जाता है
उनकी हक़ीक़त को समझने में लोगों की अक़्लें दंग रह गईं।
تَبَارَكَ اللَّهُ مَا أَحْلَى شَمَائِلَهُ
حَازَ الْجَمَالَ فَمَا أَبْهَى مُحَيَّاهُ
मुबारक़ है अल्लाह, कितनी दिलकश हैं उनकी सिफ़ात
उन्होंने सारा हुस्न पा लिया, उनका चेहरा कितना नूरानी है।
يَا عُرْبَ وَادِي النَّقَى يَا أَهْلَ كَاظِمَةٍ
فِي حَيِّكُمْ قَمَرٌ فِي الْقَلْبِ مَثْوَاهُ
ऐ वादी-ए-नक़ा के अरबों, ऐ काज़िमा के रहने वालों
तुम्हारी बस्ती में एक चाँद रहता है जिसका ठिकाना दिल में है।
صَلَّى عَلَيْهِ إِلَهُ الْعَرْشِ مَا طَلَعَتْ
شَمْسٌ وَ مَا حَدْحَدَ الْحَادِي مَطَايَاهُ
उन पर अर्श के मालिक की रहमत हो जब तक सूरज निकलता रहे
और जब तक कोई ऊँटों को हांकने वाला अपनी मंज़िल की ओर बढ़ता रहे।
اللهُ بِالْمَدْحِ لِلْمُخْتارِ مَنَّ عَلَيّْ
عَسَى يُرى لِيَ بَيْنَ المَادِحِيْنَ حَلَي
अल्लाह ने मुझे मुस्तफ़ा की मदह का फ़ज़्ल बख्शा है
शायद मैं भी उनके सना-ख़्वानों की सफ़ में नज़र आऊँ।
إِذَا أَتَيْتُ لِأَقْرَا الصُّحْفَ مِنْ عَمَلِيْ
مَالِي سِوَى مَنْ لَهُ فَضْلٌ يُشِيْرُ إِلَىّ
जब मैं अपने आमाल का दफ़्तर पढ़ने आऊँगा
तो मेरा कोई सहारा नहीं सिवाय उनके जिनके करम का इशारा मेरी तरफ़ है।
مُحَمَّدٌ سَيِّدُ الكَوْنَيْنِ وَالثَّقَلَيْـنِ
وَالفَرِيقَيْنِ مِنْ عُرْبٍ وَمِنْ عَجَمِ
मुहम्मद दोनों जहानों और दोनों मख्लूक़ के सरदार हैं
और अरब और ग़ैर-अरब दोनों गिरोहों के आका हैं।
هُوَ الحَبِيبُ الذِّي تُرْجَى شَفَاعَتُهُ
لِكُلِّ هَوْلٍ مِنَ الأَهْوَالِ مُقْتَحَمِ
वह वही महबूब हैं जिनकी शफ़ाअत की उम्मीद की जाती है
हर उस खौफ़नाक मुसीबत के वक़्त जो हम पर अचानक टूट पड़े।
نَبِيُّنَا الآمِرُ النَّاهِي فَلاَ أَحَدٌ
أَبَرَّ فِي قَوْلِ لاَ مِنْهُ وَلاَ نَعَمِ
हमारे नबी जो नेकी का हुक्म देते और बुराई से रोकते हैं
अपनी बात में उनसे ज़्यादा सच्चा कोई नहीं, चाहे वह 'नहीं' हो या 'हाँ'।
كَالزَّهْرِ فِي تَرَفٍ وَالبَدْرِ فِي شَرَفٍ
وَالبَحْرِ فِي كَرَمٍ وَالدَّهْرِ فِي هِمَمِ
ताज़गी में फूल की तरह और रूतबे में चौदहवीं के चाँद की तरह
सख़ावत में समंदर की तरह और इरादे की मज़बूती में ज़माने की तरह।
يِا رَبِّ بِالمُصْطَفَى بَلِّغْ مَقَاصِدَنَا
وَاغْفِرْ لَنَا مَا مَضَى يَا وَاسِعَ الكَرَمِ
ऐ मेरे रब, मुस्तफ़ा के वसीले से हमारी मुरादें पूरी कर दे
और हमारे पिछले गुनाह माफ़ कर दे, ऐ बेपनाह सख़ावत वाले।
وَاغْفِرْ إِلَهِي لِكُلِ المُسْلِمِينَ بِمَا
يَتْلُونَ فِي المَسْجِدِ الأَقْصَى وَفِي الحَرَمِ
और ऐ खुदा, तमाम मुसलमानों की मग़फ़िरत फ़रमा उस कलाम के सदक़े
जो वे मस्जिद-ए-अक़्सा और हरम-ए-काबा में पढ़ते हैं।
بِجَاهِ مَنْ بَيْتُهُ فِي طَيْبَةٍ حَرَمٌ
وَإسْمُهُ قَسَمٌ مِنْ أَعْظَمِ الْقَسَمِ
उनके रुतबे के सदक़े जिनका घर तैबा में एक मुक़द्दस हरम है
और जिनका नाम ही सबसे अज़ीम क़समों में से एक है।