رَسُولَ إِلَهِ الْعَالَمِينَ تَعَالَى
सकल जगत के स्वामी, सर्वोच्च के रसूल
Hi
Hi
رَسُولَ إِلَــهِ الْعَالَمِيـــــنَ تَعَالَـى
خَدِيمُكَ نَادَى يَا رَسُولُ تَعَـــالاَ
हे रब्बुल-आलामीन के रसूल, जो सबसे बुलंद है
आपके खादिम ने पुकारा है: ऐ रसूल, करीब आ जाइए
خَدِيمُكَ نَادَى يَا رَسُولُ فَلاَ أُرَى
فَقِيرًا إِلَى غَيْــرِ الْإِلَـــهِ تَعَالَــى
आपके खादिम ने पुकारा है, ऐ रसूल, तो अब मुझे न देखा जाए
अल्लाह तआला के सिवा किसी और का मोहताज
خَدِيمٌ بِأَقْصَى الْغَرْبِ يَدْعُو مُحَمَّــدًا
وَلَيْسَ يَرَى غَيْرَ الْرَّسُـــولِ ثِمَـالاَ
मग़रिब के दूर-दराज़ छोर से एक खादिम मुहम्मद को पुकारता है
जो रसूल के सिवा किसी और को अपनी पनाहगाह नहीं देखता
خَدِيمٌ ثَـوَى بِالْبَابِ وَهْــــوَ مُؤَمِّــلٌ
إِيَابًا كَرِيمًــــا وَهْـوَ جَيْــرِ أَطَــالاَ
एक खादिम जो उम्मीद के साथ दरवाज़े पर टिका है
एक मुक़द्दस इस्तक़बाल की आस में, चाहे उसका इंतज़ार लंबा रहा हो
تَصَاغَرَ عِنْدِي غَيْرُ أَحْمَــدَ إِنَّنِــي
أُرَجِّي مِنَ الْهَــادِي الْعِبَــادِ مَنَـالاَ
अहमद के सिवा मेरी नज़रों में सब छोटे हो गए हैं, क्योंकि वाक़ई
मैं बंदों के हादी से एक बड़ी बख़्शिश की उम्मीद रखता हूँ
كَرِيمَ الْسَّجَايَا وَاسِعَ الْجُودِ مَا تَرَى
لِضَيْـــــفِ كَرِيــمٍ قَــدْ أَجَادَ مَقَــالاَ
ऐ नेक सीरत और असीम सखावत वाले, आपकी क्या इनायत होगी
उस करीम के मेहमान पर, जिसने अपनी अर्ज़ बड़े सलीके से पेश की है
فَهَبْهُ عَلَى مِقْدَارِ كَفِّــكَ مُصْطَفَى الْ
بَرَايَــا عَطَاءً لاَ يَخَــافُ زَوَالاَ
तो उसे अपने सखी हाथों की सख़ावत के मुताबिक नवाज़िए, ऐ मख़लूक़ के मुस्तफ़ा
एक ऐसी अता जिसका कोई अंत न हो
فَفِي كُلِّ حَيٍّ قَدْ خَبَطْتَ بِنِعْمَــةٍ
وَإِنِّي كَشأْسٍ قَــدْ أَرُومُ نَــوَالاَ
क्योंकि हर जानदार पर आपने अपनी नेमतों की बारिश की है
और मैं भी एक आजिज़ सवाली की तरह आपके फ़ज़्ल का ख़्वाहिशमंद हूँ
عَلَيْكَ صَـــلاَةُ اللّٰهِ ثُــمَّ سَلاَمُــهُ
وَتَشْمَلُ أَصْحَابَ الْنَّبِـــيِّ وَآلاَ
आप पर अल्लाह की रहमतें और उसकी सलामती हो
जो नबी के सहाबा और उनके परिवार को भी शामिल करे