يَا قُبَّةَ الْخَضْرَا مَالِكْ
O Green Dome, How Captivating You Are
Hi
يَا قُبَّةَ الْخَضْرَا مَالِكْ
فَتَنْتِينَا بِجَمَالِكْ
ऐ हरे गुम्बद, तुम्हारी क्या शान है
कि तुमने हमें अपने सौंदर्य से मंत्रमुग्ध कर दिया है
قَالَتْ جَمَالِي بِمُحَمَّدْ
نَوَّرْ جَمِيعَ الْمَمَالِكْ
उसने कहा, "मेरा सौंदर्य मुहम्मद से है"
जिन्होंने समस्त लोकों को आलोकित कर दिया है
حَوَيْتِ خَيْرَ الْبَرِيَّةْ
سَامِي الْعُلَا وَالْمَزَايَا
तुमने सृष्टि के सर्वोत्तम को अपने भीतर स्थान दिया है
जो उच्च पद और महान गुणों के स्वामी हैं
لَهُ تَسِيرُ الْمَطَايَا
مِنْ كُلِّ تِلْكَ الْمَمَالِكْ
उन्हीं की ओर सवारियाँ बढ़ती चली आती हैं
उन तमाम दूर-दराज के राज्यों से
يَا قُبَّةَ الْخَضْرَا مَالِكْ
فَتَنْتِينَا بِجَمَالِكْ
ऐ हरे गुम्बद, तुम्हारी क्या शान है
कि तुमने हमें अपने सौंदर्य से मंत्रमुग्ध कर दिया है
قَالَتْ جَمَالِي بِمُحَمَّدْ
نَوَّرْ جَمِيعَ الْمَمَالِكْ
उसने कहा, "मेरा सौंदर्य मुहम्मद से है"
जिन्होंने समस्त लोकों को आलोकित कर दिया है
لَاحَتْ عَلَيْنَا أَنْوَارُهْ
فَاضَتْ عَلَيْنَا أَسْرَارُهْ
हम पर उनका नूर चमक उठा है
और हम पर उनके रहस्य प्रवाहित हुए हैं
بُشْرَى لَكُمْ يَا زُوَّارُهْ
بَعْدَ أَدَاءِ الْمَنَاسِكْ
ऐ उनके दर्शनार्थियों, तुम्हें शुभ समाचार हो
पवित्र अनुष्ठानों को पूर्ण करने के बाद
يَا قُبَّةَ الْخَضْرَا مَالِكْ
فَتَنْتِينَا بِجَمَالِكْ
ऐ हरे गुम्बद, तुम्हारी क्या शान है
कि तुमने हमें अपने सौंदर्य से मंत्रमुग्ध कर दिया है
قَالَتْ جَمَالِي بِمُحَمَّدْ
نَوَّرْ جَمِيعَ الْمَمَالِكْ
उसने कहा, "मेरा सौंदर्य मुहम्मद से है"
जिन्होंने समस्त लोकों को आलोकित कर दिया है
يَا سَعْدَ مَنْ شَمَّ تُرَابَهْ
شَوْقاً وَقَبَّلْ أَعْتَابَهْ
कितना सौभाग्यशाली है वह जिसने उनकी धूल को सूंघा
विरह और प्रेम में, और उनकी चौखट को चूम लिया
تَزُولُ عَنْهُ أَتْعَابُهْ
يَأْمَنْ جَمِيعَ الْمَهَالِكْ
उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं
और वह हर विनाशकारी संकट से सुरक्षित रहता है
يَا قُبَّةَ الْخَضْرَا مَالِكْ
فَتَنْتِينَا بِجَمَالِكْ
ऐ हरे गुम्बद, तुम्हारी क्या शान है
कि तुमने हमें अपने सौंदर्य से मंत्रमुग्ध कर दिया है
قَالَتْ جَمَالِي بِمُحَمَّدْ
نَوَّرْ جَمِيعَ الْمَمَالِكْ
उसने कहा, "मेरा सौंदर्य मुहम्मद से है"
जिन्होंने समस्त लोकों को आलोकित कर दिया है
صَلُّوا عَلَيْهِ يَا حُضَّارْ
وَالْآلِ وَالْصَّحْبِ الْأَخْيَارْ
ऐ उपस्थित लोगों, उन पर दरूद भेजो
और उनके परिजनों एवं श्रेष्ठ साथियों पर
تَنْجُو غداً مِنْ عَذَابِ الْنَّارْ
وَتَرْبَحُوا عَفْوَ الْمَالِكْ
तुम कल अग्नि के दंड से मुक्ति पाओगे
और उस अधिपति प्रभु की क्षमा प्राप्त कर लोगे