فَيَا نَفَحَاتِ اللهِ يَا عَطَفَاتِهِ
O Divine Breaths of Allah, O His Affections
Hi
فَيَا نَفَحَاتِ اللهِ يَا عَطَفَاتِهِ
وَيَا جَذَبَاتِ الْحَقِّ جُودِي بِزَوْرَةِ
ऐ अल्लाह की रहमत की ख़ुशबुओं और उसकी इनायतों
ऐ हक़ की रूहानी कशिशों, अपनी ज़ियारत से नवाज़ दो
وَيَا نَظَرَاتِ اللّهِ يَا لَحَظَاتِهِ
وَيَا نَسَمَاتِ اللُّطْفِ أُمِّى بِهَبَّةِ
ऐ अल्लाह की रहमत भरी नज़रों और उसकी निगाहों
ऐ लुत्फ़ की ठंडी हवाओं, मेरी तरफ़ एक झोंके के साथ आओ
وَيَا غَارَةَ الرَّحْمَانِ جُدِّىْ بِسُرْعَةِ
إِلَيْنَا وَحُلِّى عَقْدَ كُلِّ مُلِمَّةِ
ऐ रहमान की ईश्वरीय मदद, ज़रा तेज़ी से आ
हमारी ओर और हर मुसीबत की गाँठ खोल दे
وَيَا رَحْمَةَ الرَّبِّ الرَّحِيْمِ تَوَجَّهِىْ
وَأَحْيِىْ بِرُوْحِ الفَضْلِ كُلَّ رَمِيْمَةِ
ऐ रहीम परवरदिगार की रहमत, हमारी तरफ़ मुतवज्जेह हो
और अपने फ़ज़्ल की रूह से हर बेजान चीज़ को ज़िंदा कर दे
وَيَاكُلَّ أَبْوَابِ الْقَبُولِ تَفَتَّحِىْ
فَإِنَّ مَطَايَا الْقَصْدِ نَحْوَكَ أَمَّتِ
ऐ क़बूलियत के तमाम दरवाज़ों, तुम खुल जाओ
क्योंकि हमारे इरादों की सवारियाँ तुम्हारी ही ओर बढ़ी हैं
وَيَاسُحُبَ الْجُوْدِ الْإِلَهِيِّ أَمْطِرِىْ
فَإِنَّ أَكُفَّ الْمَحْلِ تِلْقَاكِ مُدَّتِ
ऐ ईश्वरीय उदारता के बादलों, अब बरस जाओ
क्योंकि तंगी और अकाल के हाथ तुम्हारी तरफ़ फैले हुए हैं
بِحُرْمَةِ هَادِيْنَا وَمُحْيِيْ قُلُوْبِنَا
وَمُرْشِدِنَا نَهْجَ الطَّرِيْقِ الْقَوِيْمَةِ
हमारे हादी और हमारे दिलों को ज़िंदा करने वाले की हुरमत के सदक़े
और सीधे रास्ते की राह दिखाने वाले के वसीले से
دَعَانَا إِلَى حَقٍّ بِحَقٍّ مُنَزَّلٍ
عَلَيْهِ مِنَ الرَّحْمَانِ أَفْضَلَ دَعْوَةِ
उन्होंने हमें हक़ की तरफ़ उस हक़ के साथ बुलाया
जो उन पर रहमान की तरफ़ से नाज़िल हुआ, जो बेहतरीन पैग़ाम है
أَجَبْنَا قَبِلْنَا مُذْعِنِيْنَ لِأَمْرِهِ
سَمِعْنَا أَطَعْنَا عَنْ هُدىً وَبَصِيْرَةِ
हमने लब्बैक कहा और उनके हुक्म को मान लिया
हमने हिदायत और बसीरत के साथ सुना और पैरवी की
فَيَارَبِّ ثَبِّتْنَا عَلَى الْحَقِّ وَالْهُدَى
وَيَارَبِّ اِقْبِضْنَا عَلَى خَيْرِ مِلَّةِ
ऐ मेरे रब, हमें हक़ और हिदायत पर साबित-क़दम रख
और ऐ परवरदिगार, हमारा ख़ात्मा बेहतरीन दीन पर करना
وَعُمَّ أُصُوْلاً وَالْفُرُوْعَ بِرَحْمَةٍ
وَأَهْلاً وَأَصْحَاباً وَكُلَّ قَرَابَةِ
और हमारे बुज़ुर्गों और औलादों को अपनी रहमत में ढाँप ले
और घर वालों, साथियों और तमाम रिश्तेदारों को भी
وَسَائِرِ أَهْلِ الدِّيْنِ مِنْ كُلِّ مُسْلِمٍ
أَقَامَ لَكَ التَّوْحِيْدَ مِنْ غَيْرِ رِيْبَةِ
और दीन के बाक़ी तमाम लोगों और हर उस मुसलमान को
जिसने बिना किसी शक के तेरी तौहीद का इक़रार किया
وَصَلِّ وَسَلِّمْ دَائِمَ الدَّهْرِ سَرْمَداً
عَلَى خَيْرِ مَبْعُوْثٍ إِلَى خَيْرِ أُمَّةِ
और हमेशा-हमेशा के लिए दुरूद व सलाम भेज
उस हस्ती पर जो बेहतरीन उम्मत की तरफ़ बेहतरीन रसूल बनकर आए
مُحَمَّدٍ الْمَخْصُوْصِ مِنْكَ بِفَضْلِكَ
الْعَظِيْمِ وَإِنْزَالِ الْكِتَابِ وَحِكْمَةِ
हज़रत मुहम्मद ﷺ पर जो तेरे अज़ीम फ़ज़्ल के लिए मख़्सूस हैं
और जो किताब व हिकमत के नुज़ूल के साथ नवाज़े गए हैं