دَاوِينِي يَا نُورَ الْحَي
मुझे चंगा करो, हे जीवंत के प्रकाश
Hi
دَاوِينِي يَا نُورَ الْحَي
دَاوِينِي وَانْظُرْ إِلَي
मुझे शफ़ा दे ऐ हय्य के नूर
मुझे शफ़ा दे और मेरी ओर देख
دَاوِينِي دَاوِي
يَا نُورَ الْحَي
मुझे शफ़ा दे, शफ़ा दे
ऐ हय्य के नूर
يَا مُحَمَّدْ أَنْتَ الْمَحْبُوبْ
وَلِأَجْلِكْ نِلْنَا الْمَطْلُوبْ
ऐ मुहम्मद, आप ही महबूब हैं
और आपकी ख़ातिर हमने मक़्सूद पा लिया
بِمَدْحِكْ تَشْتَاقُ الْقُلُوبْ
تُنْجِينَا بِيَوْمِ الْدِّينْ
आपकी मदाह से दिलों में तड़प जागती है
आप रोज़-ए-जज़ा हमें नजात दिलाएंगे
دَاوِينِي يَا نُورَ الْحَي
دَاوِينِي وَانْظُرْ إِلَي
मुझे शफ़ा दे ऐ हय्य के नूर
मुझे शफ़ा दे और मेरी ओर देख
دَاوِينِي دَاوِي
يَا نُورَ الْحَي
मुझे शफ़ा दे, शफ़ा दे
ऐ हय्य के नूर
اَلْمَادِحْ بِمَدْحُ يَقُولْ
هَوَاهُ مَدْحُ الْرَّسُولْ
मद्दाह अपनी मदाह में कहता है
उसकी लगन रसूल की मदाह है
لِأَجْلِهْ نِلْنَا الْقَبُولْ
شَفَاعَةْ بِيَوْمِ الْدِّينْ
उन्हीं के सदक़े हमें मक़बूलियत मिली
और रोज़-ए-महशर शफ़ाअत मिली
دَاوِينِي يَا نُورَ الْحَي
دَاوِينِي وَانْظُرْ إِلَي
मुझे शफ़ा दे ऐ हय्य के नूर
मुझे शफ़ा दे और मेरी ओर देख
دَاوِينِي دَاوِي
يَا نُورَ الْحَي
मुझे शफ़ा दे, शफ़ा दे
ऐ हय्य के नूर
يَا مُحَمَّدْ أَنَا الْمَدَّاحْ
وَبِمَدْحِكْ قَلْبِي يَرْتَاحْ
ऐ मुहम्मद, मैं आपका मद्दाह हूँ
और आपकी मदाह से मेरे दिल को सुकून मिलता है
أُهْدِيكَ مَسَا وَصَبَاحْ
صَلَاةً لِيَوْمِ الْدِّينْ
मैं आपको शाम और सुबह भेंट देता हूँ
रोज़-ए-जज़ा तक दुरूद व सलाम की
دَاوِينِي يَا نُورَ الْحَي
دَاوِينِي وَانْظُرْ إِلَي
मुझे शफ़ा दे ऐ हय्य के नूर
मुझे शफ़ा दे और मेरी ओर देख
دَاوِينِي دَاوِي
يَا نُورَ الْحَي
मुझे शफ़ा दे, शफ़ा दे
ऐ हय्य के नूर
يَا خَلَايِقْ صَلُّوا عَلَيْهْ
مَوْلَاكُمْ صَلَّى عَلَيْهْ
ऐ मख़लूक़, उन पर दुरूद भेजो
तुम्हारे मालिक ने उन पर दुरूद भेजा है
وَالْجِذْعُ حَنَّ إِلَيْهْ
مِنْ شُوْقُهْ أَنَّ أَنِينْ
और खजूर का तना उनके लिए तड़पा
और अपने शौक़ में उसने आहें भरीं
دَاوِينِي يَا نُورَ الْحَي
دَاوِينِي وَانْظُرْ إِلَي
मुझे शफ़ा दे ऐ हय्य के नूर
मुझे शफ़ा दे और मेरी ओर देख
دَاوِينِي دَاوِي
يَا نُورَ الْحَي
मुझे शफ़ा दे, शफ़ा दे
ऐ हय्य के नूर
صَلَاةٌ عَلَى الْمُخْتَارْ
وَالْآلِ ثُمَّ الْأَنْصَارْ
दुरूद हो उस मुस्तफ़ा पर
और आले-नबी पर, फिर अंसार पर
وَالصَّحْبِ رَفِيقِ الْغَارْ
أُهْدِيهَا مَعَ النَّسْرِينْ
और सहाबा पर, उस ग़ार के साथी पर
मैं इसे नसरीन की महक के साथ पेश करता हूँ