أَنَا مَالِي فِيَّاشْ
मेरा किसी में क्या?
Hi
اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى الْمُصْطَفَى
حَبِيبِنَا مُحَمَّد عَلَيْهِ السَّلَام
ऐ अल्लाह, दुरूद भेज मुस्तफ़ा पर
हमारे महबूब मुहम्मद ﷺ पर सलाम हो
أَنَا مَالِي فِيَّاشْ آشْ عَلَيَّا مِنِّي
نَقْلَقْ مِنْ رِزْقِي لَاشْ وَالْخَالِقْ يَرْزُقْنِي
मेरा खुद पर क्या इख़्तियार, मेरा मुझ पर क्या ज़ोर?
मैं अपनी रोज़ी की फ़िक्र क्यों करूँ, जब मेरा खालिक मुझे रिज़्क देता है
أَنَا عَبْدُ رَبٍّ لَهُ قُدْرَةٌ
يَهُونُ بِهَا كُلُّ أَمْرٍ عَسِير
मैं उस रब का बंदा हूँ जिसके पास वो कुदरत है
जिससे हर मुश्किल काम आसान हो जाता है
فَإِنْ كُنْتُ عَبْدًا ضَعِيفَ الْقُوَّةِ
فَرَبِّي عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِير
अगर मैं एक कमज़ोर और बेबस बंदा हूँ तो क्या
मेरा रब तो हर चीज़ पर कादिर है
مِنِّي آشْ عَلَيَّ وَنَا عَبْدٌ مَمْلُوكْ
وَالْأَشْيَاءْ مَقْضِيَّا مَا فِي التَّحْقِيقْ شُكُوكْ
मेरा मुझ पर क्या बस, मैं तो एक गुलाम बंदा हूँ
सब कुछ तकदीर से तय है, इसमें कोई शक नहीं
الْمَدَد الْمَدَد أَيَا رَسُولَ الله
وَاسْقِينَا بِالْمَدَد أَيَا حَبِيبَ الله
मदद कीजिए, मदद कीजिए, ऐ अल्लाह के रसूल ﷺ
और अपनी मदद से हमें सैराब कीजिए, ऐ अल्लाह के हबीब ﷺ
رَبِّي نَاظِرْ فِيَّا وَنَا نَظَرِي مَتْرُوكْ
فِي الْأَرْحَامْ وَالْأَحْشَا مِنْ نُطْفَةٍ صَوَّرْنِي
मेरा रब मुझ पर नज़र रखता है और मेरी अपनी नज़र बेमानी है
रहम और आंतों के बीच, एक नुत्फ़े से उसने मुझे बनाया
يَقُولُ لِمَا شَاءَ كُنْ فَيَكُونُ وَيُبْدِعُ سُبْحَانَهُ وَيُعِيد
وَيَحْكُمُ فِي خَلْقِهِ مَا يَشَاءُ وَيَفْعَلُ فِي مُلْكِهِ مَا يُرِيد
वो जो चाहता है उसे कहता है "हो जा" और वो हो जाता है, वही पैदा करता है और वही लौटाता है
अपनी मख्लूक में वो जो चाहे फैसला करे और अपनी सल्तनत में जो चाहे वो करे