يَا رَبَّنَا يَا مَوْلَانَا صَلِّ عَلَى مُحَمَّدْ مُصْطَفَى
يَا رَبَّنَا يَا مَوْلَانَا صَلِّ عَلَى مُحَمَّدْ مُصْطَفَى
ऐ हमारे प्रभु, हमारे मालिक! मुहम्मद मुस्तफा पर रहमत बरसा!
ऐ हमारे प्रभु, हमारे मालिक! मुहम्मद मुस्तफा पर रहमत बरसा!
يَا رَبَّنَا يَا مَوْلَانَا صَلِّ عَلَى الْمُصْطَفَى
يَا رَبَّنَا يَا مَوْلَانَا صَلِّ عَلَى مُحَمَّدْ مُصْطَفَى
ऐ हमारे प्रभु, हमारे मालिक! मुस्तफा पर रहमत बरसा!
ऐ हमारे प्रभु, हमारे मालिक! मुहम्मद मुस्तफा पर रहमत बरसा!
هَلْ مِنْ مُغِيثٍ لِي مِمَّا فِي النَّفْسِ مِنْ حُزْنٍ وَمِنْ أَسَى
قَدْ وَلَّى الْعُمْرُ فِي السَّعْيِ الْحَرَامِ فِي الصُّبْحِ وَفِي الْمَسَا
क्या कोई मुझे आत्मा के दुख और पश्चाताप से बचा सकता है?
मेरा जीवन बीत गया, सुबह से रात तक वर्जित चीजों में।
فِي تَرْكِ الْأَوْلَى مَقْتُ الْمَوْلَى لِلْقَلْبِ الَّذِي قَسَى
لٰكِنَّ الْبَارِي لِلْمُنَادِي مَنَّ نُوراً فِي الْقَلْبِ رَسَا
सही को छोड़ने से कठोर हृदय पर प्रभु की नाराज़गी आती है,
लेकिन सृष्टिकर्ता याचक को आत्मा में एक प्रकाश का वरदान देता है!
يَا رَبَّنَا يَا مَوْلَانَا صَلِّ عَلَى مُحَمَّدْ مُصْطَفَى
يَا رَبَّنَا يَا مَوْلَانَا صَلِّ عَلَى مُحَمَّدْ مُصْطَفَى
ऐ हमारे प्रभु, हमारे मालिक! मुहम्मद मुस्तफा पर रहमत बरसा!
ऐ हमारे प्रभु, हमारे मालिक! मुहम्मद मुस्तफा पर रहमत बरसा!
يَا رَبَّنَا يَا مَوْلَانَا صَلِّ عَلَى الْمُصْطَفَى
يَا رَبَّنَا يَا مَوْلَانَا صَلِّ عَلَى مُحَمَّدْ مُصْطَفَى
ऐ हमारे प्रभु, हमारे मालिक! मुस्तफा पर रहमत बरसा!
ऐ हमारे प्रभु, हमारे मालिक! मुहम्मद मुस्तफा पर रहमत बरसा!
يَا كَاشِحَ الْمُحِبِّ كَمْ تَلُومُنِي عَلَى هٰذَا الْغَرَامْ
وَالْعِشْقُ سِرُّ الْقَلْبِ لَا دَلِيلَ لَهُ إِلَّا الْمُسْتَهَامْ
ओ प्रेम के निंदक, तुम मुझे इस जलते हुए जुनून के लिए कितना दोष देते हो!
लेकिन प्रेम हृदय का रहस्य है, इसका एकमात्र प्रमाण प्रेम में पागलपन है।
مَنْ ذَاقَ خَمْرَ الْعَاشِقِينَ ذَاقَ أَطْيَبَ الْمُدَامْ
هٰذَا صِرَاطِي مُسْتَقِيماً لَا يُنَالُ بِفَنِّ الْكَلَامْ
जिसने प्रेमियों की शराब का स्वाद चखा, उसने सबसे मधुर पेय का स्वाद चखा!
यह मेरा मार्ग है, सीधा और अव्यक्त, और इसे शब्दों की कला से नहीं पाया जा सकता।
يَا رَبَّنَا يَا مَوْلَانَا صَلِّ عَلَى مُحَمَّدْ مُصْطَفَى
يَا رَبَّنَا يَا مَوْلَانَا صَلِّ عَلَى مُحَمَّدْ مُصْطَفَى
ऐ हमारे प्रभु, हमारे मालिक! मुहम्मद मुस्तफा पर रहमत बरसा!
ऐ हमारे प्रभु, हमारे मालिक! मुहम्मद मुस्तफा पर रहमत बरसा!
يَا رَبَّنَا يَا مَوْلَانَا صَلِّ عَلَى الْمُصْطَفَى
يَا رَبَّنَا يَا مَوْلَانَا صَلِّ عَلَى مُحَمَّدْ مُصْطَفَى
ऐ हमारे प्रभु, हमारे मालिक! मुस्तफा पर रहमत बरसा!
ऐ हमारे प्रभु, हमारे मालिक! मुहम्मद मुस्तफा पर रहमत बरसा!
سَرَى فِي لَيْلَةِ الْإِسْرَاءِ ظَاهِراً بِعَالَمِ الْخَفَا
دَنَا مِنْ رَبِّ الْعَرْشِ حَتَّى نَالَ مِنْ عَطَايَاهُ الْأَوْفَى
इस्रा की रात को वह प्रकट रूप से अदृश्य क्षेत्र में चढ़ा
सिंहासन के प्रभु के निकट आया, और उसकी पूर्णतम उपहार प्राप्त की।
مَا زَاغَتْ عَيْنُ الْمُصْطَفَى فَكَانَتْ عَهْداً وَوَفَا
هٰذَا النَّبِي أَدْرِكْ بِهِ نَوَالاً وَمَنَازِلَ الصَّفَا
मुस्तफा की आँख नहीं भटकी; एक वचन पूरा हुआ।
यह है पैगंबर! उसके माध्यम से अनुग्रह और पवित्रता की डिग्रियाँ प्राप्त करो!
يَا رَبَّنَا يَا مَوْلَانَا صَلِّ عَلَى مُحَمَّدْ مُصْطَفَى
يَا رَبَّنَا يَا مَوْلَانَا صَلِّ عَلَى مُحَمَّدْ مُصْطَفَى
ऐ हमारे प्रभु, हमारे मालिक! मुहम्मद मुस्तफा पर रहमत बरसा!
ऐ हमारे प्रभु, हमारे मालिक! मुहम्मद मुस्तफा पर रहमत बरसा!
يَا رَبَّنَا يَا مَوْلَانَا صَلِّ عَلَى الْمُصْطَفَى
يَا رَبَّنَا يَا مَوْلَانَا صَلِّ عَلَى مُحَمَّدْ مُصْطَفَى
ऐ हमारे प्रभु, हमारे मालिक! मुस्तफा पर रहमत बरसा!
ऐ हमारे प्रभु, हमारे मालिक! मुहम्मद मुस्तफा पर रहमत बरसा!
شَفِيعِي عِنْدَ هَوْلِ الْحَشْرِ رَافِعاً لِرَايَةِ الْآمَالْ
تَرَى الْبَرَايَا غُبْراً شُعْثاً خَوْفُهُمْ مِنْ رُؤْيَةِ الْأَعْمَالْ
प्रलय के दिन मेरा मध्यस्थ, आशा का झंडा ऊँचा उठाते हुए
सभी मानवता को धूल में और अव्यवस्थित देखो, अपने कर्मों का सामना करने से डरते हुए
لَا غَوْثَ عِنْدَ ذَاكَ الْخَوْفِ حِينَ تَنْقَضِي الْآجَالْ
إِلَّا بِمَنْ عَلَيْهِ مَنَّ الْمَوْلَى بِالْقَبُولِ وَالْكَمَالْ
उस भय से कोई बचाव नहीं होगा, जब सभी जीवन समाप्त हो जाएंगे
सिवाय उसके जिसे भगवान ने स्वीकृति और पूर्णता के साथ आशीर्वाद दिया।