نَحْنُ فِي سَاحَةِ الْحُسَيْنِ نَزَلْنَا
We Have Alighted in the Courtyard of al-Hussain Do you like this personality?
Hi
نَحْنُ فِي سَاحَةِ الْحُسَيْنِ نَزَلْنَا
فِي حِمَى اللهِ مَنْ أَتَى لِحُسَيْنَا
हम हुसैन के आंगन में हाज़िर हुए हैं
जो हुसैन की पनाह में आया, वो अल्लाह की हिफ़ाज़त में है
يَا ابْنَ طَهَ الْبَشِيرِ جِئْنَا بِبَابِكَ
وَشَرَّفْنَا هُنَا بِلَثْمِ عِتَابِكَ
ऐ बशारत देने वाले ताहा के लाल, हम आपके दर पर आए हैं
और यहाँ आपकी मुक़द्दस चौखट को चूमने का शरफ़ पाया है
يَا حَفِيدَ الرَّسُولِ جِئْنَا رِحَابَكَ
مَنْبَعَ الْجُودِ مَصْدَرَ الْكَرَمَيْنَا
ऐ रसूल के नवासे, हम आपकी बारगाह में आए हैं
आप सखावत के चश्मे और अज़ीम करम के स्रोत हैं
رَحْمَةُ اللهِ لِلْبَرِيَّةْ عَطَاهَا
مَنْ قَرَنَ ذَاتُهُ بِذَاتِهِ وَاصْطَفَاهَا
अल्लाह की रहमत, जो तमाम मख़लूक़ को अता की गई
जिसे उसने अपनी ज़ात के क़रीब किया और चुन लिया
يَثْرِبٌ شُرِّفَتْ بِهِجْرَةِ طَهَ
يَا هَنَا مِصْرَ يَوْمَ جَاءَ حُسَيْنَا
ताहा की हिजरत से यसरिब को इज़्ज़त मिली
और मिस्र कितना खुशनसीब है जिस दिन हुसैन वहाँ आए!
اَلْأَمَاكِنْ إِلَى الْكِنَانَةْ تُهَنِّي
آلَ مِصْرٍ قَدْ جَاءَ مَنْ نَابَ عَنِّي
तमाम सरज़मीं मिस्र को मुबारकबाद देती है
“मिस्र वालों के पास वो आया है जो मेरी नुमाइंदगी करता है”
لَا شَرِيفٌ سِوَاكَ فِي الْخَلْقِ طُرَّهْ
يَا كَرِيمَ الْأَجْدَادِ وَالْأَبَوَيْنَا
पूरी कायनात में आपके जैसा कोई शरीफ़ नहीं
ऐ बुलंद मर्तबे वाले बुज़ुर्गों और वालिदैन की औलाद
أُمُّكَ الزَّهْرَا لِلْمُكَمَّلِ قُرَّهْ
لَا شَبِيهٌ لَهَا مِنَ الْكَنْزِ دُرَّهْ
आपकी वालिदा ज़हरा, कामिल नबी की आँखों की ठंडक हैं
वो उस खज़ाने का ऐसा मोती हैं जिसकी कोई मिसाल नहीं
قَالَ خَيْرُ الْوَرَى حُسَيْنٌ مِنِّي
فِي حَدِيثٍ رَوَاهُ أَنَا مِنْ حُسَيْنَ
बेहतरीन-ए-ख़ल्क ने फरमाया, "हुसैन मुझसे है"
और हदीस की रिवायत है कि "मैं हुसैन से हूँ"
أَنْتَ بِالْأُمِّ قَدْ بَلَغْتَ الْكَمَالَ
وَعَلِيٌّ بِهِ تَسُودُ الرِّجَالَ
अपनी वालिदा के सदक़े आपने कमाल की बुलंदी पाई
और अली के ज़रिए आपको वो सियादत मिली जिससे मर्दों की रहबरी होती है
أَنْتَ فَرْعٌ زَكِيٌّ مِنْ خَيْرِ آلَا
عُنْصُرَ النُّورِ مَنْبِتُ الْحَرَمَيْنَا
आप बेहतरीन ख़ानदान की एक पाकीज़ा शाख़ हैं
नूर का जौहर और मुक़द्दस नस्ल से पैदा हुए
فِي قُلُوبِ الْخِيَارِ رَبِّي كَتَبَكُمْ قَالَ
فِي الذِّكْرِ قُرْبَةً قُرْبَكُمْ
मेरे रब ने नेक लोगों के दिलों में आपकी मोहब्बत लिख दी है
और कुरान में आपकी नज़दीकी को खुदा के क़रीब होने का वसीला बताया है
كُلُّ حَسَبٍ مَقْطُوعٌ غَيْرَ حَسَبِكُمْ
قَبْضَةُ الْحَقِّ أَفْضَلُ النَّسَبَيْنَا
आपके नसब के सिवा हर नसब का सिलसिला टूट जाएगा
यह हक़ की पकड़ और तमाम नसबों में सबसे अफ़ज़ल है
مَنْ يَزُورُ الْإِمَامَ أَتَتْهُ عِنَايَا
إِنْ أَصِلْ سَاحَهُ يَتِمُّ هَنَايَا
जो भी इमाम की ज़ियारत करता है, उसे खुसूसी इनायत मिलती है
अगर मैं उनके सहन तक पहुँच जाऊँ, तो मेरी खुशी मुकम्मल हो जाए
قَدْ أَتَيْنَاكَ وَالرِّكَابُ حَنَايَا
يَا ابْنَ خَيْرِ الْأَنَامِ نَظْرَةْ إِلَيْنَا
हम आपके पास आए हैं और हमारी सवारियाँ सफ़र से थक चुकी हैं
ऐ बेहतरीन-ए-बशर के बेटे, हम पर एक नज़र-ए-करम कीजिए
خَاطَبَ اللهُ لِلْحُسَيْنِ شَفَاهَا
يَا شَهِيدَ الْمَحَبَّةِ يَا سِبْطَ طَهَ
अल्लाह ने हुसैन को ख़िताब किया और उनके मर्तबे को बुलंद किया
ऐ मोहब्बत के शहीद, ऐ ताहा के नवासे!
آيَةُ الطُّهْرِ أَنْتَ مَجْلَى صَفَاهَا
أَنْتَ رَيْحَانَتَاهُ وَالسِّبْطَيْنَا
आप पाकीज़गी की निशानी और उसकी नूरानियत का आईना हैं
आप उनके दो फूल और दो मुक़द्दस नवासे हैं
جِئْنَا سَاحًا بِهَا تُحَطُّ الْخَطَايَا
مَنْهَلَ الْجُودِ مَصْدَرًا لِلْعَطَايَا
हम उस सहन में आए हैं जहाँ गुनाह झाड़ दिए जाते हैं
जो सखावत का चश्मा और अताओं का स्रोत है
مَنْ سِوَاكُمْ يُرْجَى لِكَشْفِ الْبَلَايَا
رَحْمَةُ اللهِ قَدْ هَدَاهَا إِلَيْنَا
आपके सिवा बलाओं को टालने के लिए किससे उम्मीद की जाए
अल्लाह की रहमत ने ही हमें आपकी तरफ हिदायत दी है
ضَرَّنِي الْكَرْبُ جِئْتُ سَاحَ الْكِرَامَا
شَاكِيًا بَاكِيًا مِنَ الْآَمَا
दुख ने मुझे घेरा तो मैं सखियों के दरबार में आया हूँ
अपने सहे हुए दर्द से रोते और फ़रियाद करते हुए
بِأَخِيكَ الْعَظِيمْ حَسَنُ الْإِمَامَا
دَوْحَةِ النُّورِ طَاهِرِ الْعُنْصُرَيْنَا
आपके अज़ीम भाई, इमाम हसन के वास्ते से
जो नूर का दरख़्त और दोनों तरफ़ से पाकीज़ा नस्ल हैं
دَاوِ جِسْمًا مِنَ الضَّنَا كَمْ عَانَى
وَكَذَا الضُّرُّ وَالْأَسَى مَسَّانَا
उस जिस्म को शिफ़ा दीजिए जो बीमारी और तकलीफ़ों से थक चुका है
क्योंकि मुसीबत और ग़म ने हमें भी छू लिया है
فَهِيَ كَوْكَبْ بَدَا مَعَ الْكَوْكَبَانِ
أُمُّ هَاشِمْ كَرِيمَةُ الدَّارَيْنَا
और वो एक सितारा हैं जो दो सितारों के साथ ज़ाहिर हुआ
उम्मे हाशिम, जो दोनों जहान की मोहतरम ख़ातून हैं
حُبُّكُمْ فِي الْعُرُوقِ وَالْقَلْبُ يَسْرِي
جِئْتُكُمْ بَدِّلُوا لِعُسْرِي بِيُسْرِي
आपकी मोहब्बत मेरी रगों और मेरे दिल में दौड़ती है
मैं आपके पास आया हूँ, मेरी तंगी को आसानी में बदल दीजिए
بِأَبِيكَ الْإِمَامُ اجْبُرِي لِي كَسْرِي
فُكَّ أَسْرِي وَسُدَّ عَنِّي الدَّيْنَا
आपके वालिद इमाम के वास्ते से मेरी शिकस्तगी को जोड़ दीजिए
मुझे बंदिशों से आज़ाद कीजिए और मेरा क़र्ज़ अदा कर दीजिए
طَيِّبُونِي لِكَيْ أَعُودَ بِلَادِي
وَبَرِّئُونِي لِكَيْ أَرَى أَوْلَادِي
मुझे सेहत और सुकून दीजिए ताकि मैं अपने वतन लौट सकूँ
मुझे शिफ़ा दीजिए ताकि मैं फिर से अपने बच्चों को देख सकूँ
فَإِذَا سِرْتُ يَا سَاكِنِينَ فُؤَادِي
تِمُّوا لِلنِّعْمَةِ وَاحْفَظُوهَا عَلَيْنَا
और जब मैं रुख़सत हूँ, ऐ मेरे दिल में बसने वालों
तो इस नेमत को मुकम्मल फ़रमाइए और इसे हमारे लिए महफ़ूज़ रखिए