طَابَ لِي خَلْعُ عِذَارِي
My Wantonness Befits Me
Hi
Hi
طَابَ لِي خَلْعُ عِذَارِي
فِي هَوَى الْبَدْرِ الْتَّمَامْ
मुझे अपनी लोक-लाज का त्याग सुहाता है
उस पूर्ण चंद्रमा के प्रति मेरे अनुराग में
بِافْتِقَارِي وَانْكِسَارِي
أَرْتَجِيْ نَيْلَ الْمَرَامْ
अपनी दीनता और अपनी विवशता के साथ
मैं अपनी अभिलाषा की प्राप्ति की आशा करता हूँ
يَا عَذُوْلِي لَا تَلُمْنِي
مَا عَلَى الْعَاشِقُ مَلَامْ
हे मेरे निंदक, मुझे दोष न दे
क्योंकि प्रेमी पर कोई लांछन नहीं होता
اُدْنُ مِنِّي وَارْوِ عَنِّيْ
أَنَا فِي الْعِشْقِ إِمَامْ
मेरे समीप आओ और मेरा वृत्तांत सुनाओ
क्योंकि मैं प्रेम की कला में निपुण हूँ
خَمْرَةُ الْأَحْبَابِ تُجْلَ
هِيَ حِلٌّ لَا حَرَامْ
प्रियजनों की वह मदिरा छलक रही है
जो जायज़ है, वर्जित नहीं
مِنْ عُيُونِ الْعِيْنِ تُمْلَى
صَانَهَا الْبَرُّ الْسَّلَامْ
मृगनयनी आँखों के स्रोतों से यह भरी जाती है
जिसे परम-कृपालु और शांतिदाता ने सुरक्षित रखा है
يَا أَخَا الْأَشْوَاقِ يَمِّمْ
سَيِّدَ الْرُّسْلِ الْكِرَامْ
हे विरह की तड़प के राही, अपना मार्ग प्रशस्त कर
उन महान पैगंबरों के स्वामी की ओर
وَاغْنَمِ الْذِّكْرَ وَزَمْزِمْ
بِصَلَاةٍ مَعْ سَلَامْ
सुमिरन का लाभ उठाओ और गुनगुनाओ
उन पर असीम कृपा और शांति की दुआएँ
لِحَبِيْبِ الله أَحْمَدْ
كُلَّمَا جَنَّ الْظَّلَامْ
अल्लाह के प्रिय हबीब अहमद पर
जब भी रात का अंधकार गहराता है
كُلُّ مَنْ وَالَاهُ يَسْعَدْ
وَيَنَالْ حُسْنَ الْخِتَامْ
जो भी उनसे प्रेम करता है वह सौभाग्यशाली है
और वह सुखद अंत प्राप्त करता है