مُوَدَّعْ مُوَدَّعْ يَا رَمَضَانْ
अलविदा, अलविदा, ऐ रमज़ान
Hi
Hi
مُوَدَّعْ مُوَدَّعْ يَا رَمَضَانْ
عَوْدَةً عَلَيْنَا بِالْغُفْرَانْ
अलविदा, अलविदा, ऐ रमज़ान
लौट आ हम पर बख़्शिश लेकर
حُوَيْدِي أَعِدْ لِي (يَا رَمَضَانْ)
حَدِيثَ الْحَبَائِبْ (يَا رَمَضَانْ)
ऐ नग़मा-ख़्व़ां, फिर सुना मुझे (ऐ रमज़ान)
महबूबों की दास्तानें (ऐ रमज़ान)
مُوَدَّعْ مُوَدَّعْ يَا رَمَضَانْ
عَوْدَةً عَلَيْنَا بِالْغُفْرَانْ
अलविदा, अलविदा, ऐ रमज़ान
लौट आ हम पर बख़्शिश लेकर
وَمَا حَالَ مِنْهُمْ (يَا رَمَضَانْ)
عَنِ الْعَيْنِ غَائِبْ (يَا رَمَضَانْ)
और वो जो जुदा हो गए (ऐ रमज़ान)
नज़रों से ओझल होकर (ऐ रमज़ान)
مُوَدَّعْ مُوَدَّعْ يَا رَمَضَانْ
عَوْدَةً عَلَيْنَا بِالْغُفْرَانْ
अलविदा, अलविदा, ऐ रमज़ान
लौट आ हम पर बख़्शिश लेकर
جَمِيلُ الْمُحَيَّا (يَا رَمَضَانْ)
جَعِيد أَمْ ذَوَائِبْ (يَا رَمَضَانْ)
वो हसीन रुख़सार वाला (ऐ रमज़ान)
पेच-ओ-ख़म ज़ुल्फ़ों वाला (ऐ रमज़ान)
مُوَدَّعْ مُوَدَّعْ يَا رَمَضَانْ
عَوْدَةً عَلَيْنَا بِالْغُفْرَانْ
अलविदा, अलविदा, ऐ रमज़ान
लौट आ हम पर बख़्शिश लेकर
رَعَا الله لَيَالِي (يَا رَمَضَانْ)
حُظِينَا بِوَصْلِه (يَا رَمَضَانْ)
अल्लाह सलामत रखे इन रातों को (ऐ रमज़ान)
ताकि हमें उनका विसाल नसीब हो (ऐ रमज़ान)
مُوَدَّعْ مُوَدَّعْ يَا رَمَضَانْ
عَوْدَةً عَلَيْنَا بِالْغُفْرَانْ
अलविदा, अलविदा, ऐ रमज़ान
लौट आ हम पर बख़्शिश लेकर
وَطَابَ اتِّصَالِي (يَا رَمَضَانْ)
بِعَلِّهْ وَنَهْلِهْ (يَا رَمَضَانْ)
और मेरा पाक ताल्लुक़ हो (ऐ रमज़ान)
उनके मीठे जाम के साथ (ऐ रमज़ान)
مُوَدَّعْ مُوَدَّعْ يَا رَمَضَانْ
عَوْدَةً عَلَيْنَا بِالْغُفْرَانْ
अलविदा, अलविदा, ऐ रमज़ान
लौट आ हम पर बख़्शिश लेकर
فَيَا ذَا الْجَلَالِ (يَا رَمَضَانْ)
لُفْ شَمْلِي بِشَمْلِه (يَا رَمَضَانْ)
ऐ साहिब-ए-जलाल (ऐ रमज़ान)
मेरी निस्बत उनसे जोड़ दे (ऐ रमज़ान)
مُوَدَّعْ مُوَدَّعْ يَا رَمَضَانْ
عَوْدَةً عَلَيْنَا بِالْغُفْرَانْ
अलविदा, अलविदा, ऐ रमज़ान
लौट आ हम पर बख़्शिश लेकर
فَقَلْبِي مِنَ الْبُعْدِ (يَا رَمَضَانْ)
وَالْهَجْرِ ذَائِبْ (يَا رَمَضَانْ)
मेरा दिल इस दूरी (ऐ रमज़ान)
और हिज्र से पिघल रहा है (ऐ रमज़ान)
مُوَدَّعْ مُوَدَّعْ يَا رَمَضَانْ
عَوْدَةً عَلَيْنَا بِالْغُفْرَانْ
अलविदा, अलविदा, ऐ रमज़ान
लौट आ हम पर बख़्शिश लेकर
أَنَا سَأَتِرُك الْهَمْ (يَا رَمَضَانْ)
وَوَاصِلْ سُرُورِي (يَا رَمَضَانْ)
मैं सब रंज ओ ग़म छोड़ दूँगा (ऐ रमज़ान)
और मुसलसल शाद रहूँगा (ऐ रमज़ान)
مُوَدَّعْ مُوَدَّعْ يَا رَمَضَانْ
عَوْدَةً عَلَيْنَا بِالْغُفْرَانْ
अलविदा, अलविदा, ऐ रमज़ान
लौट आ हम पर बख़्शिश लेकर
وَلِي رَبِّ يَعْلَمْ (يَا رَمَضَانْ)
بِخَافِي أُمُورِي (يَا رَمَضَانْ)
मेरा रब वाक़िफ़ है (ऐ रमज़ान)
मेरे पोशीदा मामलात से (ऐ रमज़ान)
مُوَدَّعْ مُوَدَّعْ يَا رَمَضَانْ
عَوْدَةً عَلَيْنَا بِالْغُفْرَانْ
अलविदा, अलविदा, ऐ रमज़ान
लौट आ हम पर बख़्शिश लेकर
أَرَى اللَّوْمَ عِنْدِي (يَا رَمَضَانْ)
خَطَا غَيْرَ صَائِبْ (يَا رَمَضَانْ)
मैं मलामत को समझता हूँ (ऐ रमज़ान)
एक सरासर ग़लत राह (ऐ रमज़ान)
مُوَدَّعْ مُوَدَّعْ يَا رَمَضَانْ
عَوْدَةً عَلَيْنَا بِالْغُفْرَانْ
अलविदा, अलविदा, ऐ रमज़ान
लौट आ हम पर बख़्शिश लेकर
أَنَا مُسْتَجِير بِالْ (يَا رَمَضَانْ)
جَمَالِ الْمُكَمَّلْ (يَا رَمَضَانْ)
मैं पनाह मांगता हूँ (ऐ रमज़ान)
उस कामिल हुस्न के सदक़े (ऐ रमज़ान)
مُوَدَّعْ مُوَدَّعْ يَا رَمَضَانْ
عَوْدَةً عَلَيْنَا بِالْغُفْرَانْ
अलविदा, अलविदा, ऐ रमज़ान
लौट आ हम पर बख़्शिश लेकर
وَمَنْ فِي النَّبِيِّينَ (يَا رَمَضَانْ)
أَفْضَلْ وَأَكْمَلْ (يَا رَمَضَانْ)
जो तमाम नबियों में (ऐ रमज़ान)
सबसे अफ़ज़ल और कामिल हैं (ऐ रमज़ान)
مُوَدَّعْ مُوَدَّعْ يَا رَمَضَانْ
عَوْدَةً عَلَيْنَا بِالْغُفْرَانْ
अलविदा, अलविदा, ऐ रमज़ान
लौट आ हम पर बख़्शिश लेकर
أَبُو الْقَاسِمْ أَحْمَد (يَا رَمَضَانْ)
لَنَا خَيْرَ مُرْسَلْ (يَا رَمَضَانْ)
अबुल क़ासिम अहमद (ऐ रमज़ान)
हमारे लिए बेहतरीन रसूल हैं (ऐ रमज़ान)
مُوَدَّعْ مُوَدَّعْ يَا رَمَضَانْ
عَوْدَةً عَلَيْنَا بِالْغُفْرَانْ
अलविदा, अलविदा, ऐ रमज़ान
लौट आ हम पर बख़्शिश लेकर
بِهِ تَنْقَضِي لِي (يَا رَمَضَانْ)
جَمِيعُ الْمَطَالِبْ (يَا رَمَضَانْ)
उन्हीं के तुफ़ैल (ऐ रमज़ान)
मेरी हर हाजत पूरी होती है (ऐ रमज़ान)
مُوَدَّعْ مُوَدَّعْ يَا رَمَضَانْ
عَوْدَةً عَلَيْنَا بِالْغُفْرَانْ
अलविदा, अलविदा, ऐ रमज़ान
लौट आ हम पर बख़्शिश लेकर
وَمَنْ كَانَ جَدُّهْ (يَا رَمَضَانْ)
مُحَمَّدْ تَبَجَّحْ (يَا رَمَضَانْ)
जिन्हें मुहम्मद (ﷺ) का जद्द होने का (ऐ रमज़ान)
फ़ख्र और एज़ाज़ हासिल है (ऐ रमज़ान)
مُوَدَّعْ مُوَدَّعْ يَا رَمَضَانْ
عَوْدَةً عَلَيْنَا بِالْغُفْرَانْ
अलविदा, अलविदा, ऐ रमज़ान
लौट आ हम पर बख़्शिश लेकर
فَفِي كُلِّ وَزْنَةْ (يَا رَمَضَانْ)
فَوَزْنَتُهْ أَرْجَحْ (يَا رَمَضَانْ)
तो हर मीज़ान पर (ऐ रमज़ान)
उनका पलड़ा भारी रहेगा (ऐ रमज़ान)
مُوَدَّعْ مُوَدَّعْ يَا رَمَضَانْ
عَوْدَةً عَلَيْنَا بِالْغُفْرَانْ
अलविदा, अलविदा, ऐ रमज़ान
लौट आ हम पर बख़्शिश लेकर
بِبَرْكَتِهْ رَبِّي (يَا رَمَضَانْ)
يُجَاوِزْ وَيَسْمَحْ (يَا رَمَضَانْ)
उन्हीं की बरकत से मेरा रब (ऐ रमज़ान)
दरगुज़र और माफ़ फरमाता है (ऐ रमज़ान)
مُوَدَّعْ مُوَدَّعْ يَا رَمَضَانْ
عَوْدَةً عَلَيْنَا بِالْغُفْرَانْ
अलविदा, अलविदा, ऐ रमज़ान
लौट आ हम पर बख़्शिश लेकर
إِذَا اغْيَتْ عَلَيْنَا (يَا رَمَضَانْ)
جَمِيعُ الْمَذَاهِبْ (يَا رَمَضَانْ)
जब तमाम रास्ते (ऐ रमज़ान)
हम पर दुश्वार हो जाएँ (ऐ रमज़ान)